H624.2 विरुधार्थी शब्द का अर्थ देकर वाक्य मे प्रयोग करते है।
इकाई २ : एक जगत, एक लोक (पृष्ठ १०-११)
१. विश्व × देश
अर्थ : विश्व = संपूर्ण संसार; देश = एक राष्ट्र
वाक्य : सारा विश्व प्रेम और शांति का संदेश चाहता है।
वाक्य : भारत हमारा प्यारा देश है।
२. धरा × गगन
अर्थ : धरा = धरती / पृथ्वी; गगन = आकाश / नभ
वाक्य : हरियाली से भरी धरा बहुत सुंदर लगती है।
वाक्य : रात में नीले गगन में चाँद चमकता है।
३. प्रकाश × अंधकार
अर्थ : प्रकाश = उजाला; अंधकार = अँधेरा
वाक्य : सूरज की किरणें चारों ओर प्रकाश फैलाती हैं।
वाक्य: दीपक जलते ही कमरे का अंधकार मिट गया।
४. शुभ × अशुभ
अर्थ : शुभ = मंगलकारी / अच्छा; अशुभ = अमंगलकारी / बुरा
वाक्य : नए घर में प्रवेश करना शुभ माना जाता है।
वाक्य: हमें किसी भी कार्य के लिए मन में अशुभ विचार नहीं लाने चाहिए।
५. चेतन × जड़
अर्थ : चेतन = सजीव / जिसमें चेतना हो; जड़ = निर्जीव / अचेतन
वाक्य : मनुष्य और पशु-पक्षी चेतन प्राणी हैं।
वाक्य : पत्थर एक जड़ वस्तु है।
६. जीवन × मृत्यु
अर्थ : जीवन = जिंदगी; मृत्यु = मौत
वाक्य : अच्छे कर्म करने से ही जीवन सफल बनता है।
वाक्य : संसार में जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
७. स्वामी × दास
अर्थ : स्वामी = मालिक; दास = सेवक / नौकर
वाक्य : कुत्ता अपने स्वामी के प्रति बहुत वफादार होता है।
वाक्य : सच्चा भक्त स्वयं को ईश्वर का दास मानता है।
इकाई ३ : समझदार नन्ही (पृष्ठ १८)
८. सूखा × गीला
अर्थ : सूखा = जिसमें नमी न हो; गीला = भीगा हुआ
वाक्य : कड़ी धूप में कपड़े जल्दी सूखकर सूखे हो जाते हैं।
वाक्य : बारिश में भीगने से मेरा बस्ता गीला हो गया।
९. धूप × छाँव
अर्थ : धूप = सूर्य का ताप / रोशनी; छाँव = छाया / शीतलता
वाक्य : दोपहर के समय बाहर बहुत तेज धूप थी।
वाक्य : थके हुए राहगीर ने बरगद के पेड़ की छाँव में आराम किया।
१०. भलाई × बुराई
अर्थ : भलाई = नेकी / अच्छा काम; बुराई = बदी / दोषपूर्ण काम
वाक्य : नन्ही ने बिच्छू के साथ हमेशा भलाई की।
वाक्य : हमें कभी किसी के साथ बुराई नहीं करनी चाहिए।
११. पाना × खोना
अर्थ : पाना = प्राप्त करना; खोना = गँवाना
वाक्य : मेहनत करने वाला व्यक्ति हर मंजिल को पा लेता है।
वाक्य : लापरवाही के कारण किसी बहुमूल्य वस्तु को खोना नहीं चाहिए।
१૨. प्रसन्न × अप्रसन्न
अर्थ : प्रसन्न = खुश; अप्रसन्न = नाराज / नाखुश
वाक्य : पुरस्कार पाकर छात्र बहुत प्रसन्न हुआ।
वाक्य: झूठ बोलने पर अध्यापक छात्र से अप्रसन्न हो गए।
इकाई ५ : धरती को महकाएँ (पृष्ठ ३३)
१३. अंधकार × प्रकाश
अर्थ : अंधकार = अँधेरा; प्रकाश = उजाला
वाक्य : सूरज ढलते ही चारों ओर अंधकार छा गया।
वाक्य: नन्हे दीपक ने अपने प्रकाश से पूरे कमरे को रोशन कर दिया।
पुनरावर्तन १ (पृष्ठ ३०)
१४. स्वच्छ × अस्वच्छ
अर्थ : स्वच्छ = साफ-सुथरा / निर्मल; अस्वच्छ = गंदा / मैला
वाक्य : हमें हमेशा स्वच्छ जल ही पीना चाहिए।
वाक्य : अस्वच्छ भोजन करने से अनेक बीमारियाँ फैलती हैं।
१५. दूर × पास
अर्थ : दूर = फासले पर; पास = निकट / समीप
वाक्य : विद्यालय मेरे घर से बहुत दूर स्थित है।
वाक्य : मेरे घर के पास ही एक सुंदर बगीचा है।
इकाई ८ : राजा का हिस्सा (पृष्ठ ५६)
१६. राजा × रंक (प्रजा)
अर्थ : राजा = नृप / शासक; रंक = निर्धन / दरिद्र
वाक्य: राजा भोज अपनी प्रजा की भलाई के लिए प्रसिद्ध थे।
वाक्य : समय का पहिया राजा को रंक और रंक को राजा बना सकता है।
१७. पास × दूर
अर्थ : पास = निकट; दूर = फासले पर
वाक्य : किसान राजा के पास जाकर हाथ जोड़कर खड़ा हो गया।
वाक्य : खेत गाँव से काफी दूर था।
१८. भला × बुरा
अर्थ : भला = नेक / सज्जन; बुरा = दुष्ट / खराब
वाक्य : भला व्यक्ति हमेशा दूसरों की सहायता करता है।
वाक्य: किसी का बुरा चाहने वाले का कभी कल्याण नहीं होता।
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