| 1 | अक्ल बड़ी या भैंस | शारीरिक शक्ति से बुद्धि बड़ी होती है। | दुबले-पतले चतुर ने पहलवान को हरा दिया, इसे कहते हैं अक्ल बड़ी या भैंस। |
| 2 | उल्टा चोर कोतवाल को डांटे | अपराधी ही निर्दोष पर दोष लगाए। | गलती तुम्हारी है और डांट मुझे रहे हो, यह तो वही हुआ - उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। |
| 3 | ऊंची दुकान फीका पकवान | केवल बाहरी दिखावा होना। | उस होटल का नाम बहुत सुना था, पर खाना बेकार है। सच है - ऊंची दुकान फीका पकवान। |
| 4 | एक पंथ दो काज | एक प्रयत्न से दो लाभ होना। | मैं परीक्षा देने दिल्ली गया और वहां घूम भी लिया, इसे कहते हैं एक पंथ दो काज। |
| 5 | जैसा देश वैसा भेष | परिस्थिति के अनुसार रहना। | विदेश जाकर वहां के नियम मानना जरूरी है, क्योंकि जैसा देश वैसा भेष अपनाना पड़ता है। |
| 6 | दूर के ढोल सुहावने | दूर से चीजें अच्छी लगना। | शहर की चकाचौंध दूर से अच्छी है, पर वहां रहना कठिन है। सच है - दूर के ढोल सुहावने। |
| 7 | नाच न जाने आंगन टेढ़ा | अपनी कमी छिपाने के लिए बहाना बनाना। | तुम्हें हारमोनियम बजाना आता नहीं और कह रहे हो कि वह खराब है। इसे कहते हैं - नाच न जाने आंगन टेढ़ा। |
| 8 | अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत | समय बीत जाने पर पछतावा करना बेकार है। | साल भर पढ़े नहीं, अब फेल होने पर रो रहे हो। पर अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत। |
| 9 | जैसी करनी वैसी भरनी | कर्म के अनुसार फल मिलना। | रामू ने दूसरों को बहुत सताया, अब खुद मुसीबत में है। सच है - जैसी करनी वैसी भरनी। |
| 10 | अंत भला तो सब भला | परिणाम अच्छा हो तो सब अच्छा माना जाता है। | शुरुआत में बहुत मुश्किलें आईं, पर आखिर में हम मैच जीत गए। अंत भला तो सब भला। |
| 11 | हाथ कंगन को आरसी क्या | प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। | मेरी चतुराई देखनी है तो मैच देखो, हाथ कंगन को आरसी क्या। |
| 12 | आम के आम गुठलियों के दाम | दुगुना लाभ होना। | पुरानी किताबें बेचकर पैसे भी मिल गए और अलमारी भी खाली हो गई, यह तो आम के आम गुठलियों के दाम वाली बात हुई। |
| 13 | काला अक्षर भैंस बराबर | बिल्कुल अनपढ़ होना। | दादाजी को पत्र मत दो, उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। |
| 14 | खोदा पहाड़ निकली चुहिया | बहुत मेहनत पर फल कम मिलना। | दिन भर मेहनत करके उसने सिर्फ दस रुपये कमाए, यह तो वही बात हुई - खोदा पहाड़ निकली चुहिया। |
| 15 | घर का भेदी लंका ढाए | आपसी फूट से सर्वनाश होता है। | विभीषण ने राम को रावण का रहस्य बताया था, तभी कहा गया है - घर का भेदी लंका ढाए। |
| 16 | दूध का दूध पानी का पानी | सच्चा न्याय करना। | चतुर बीरबल ने फैसला सुनाकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। |
| 17 | मन चंगा तो कठौती में गंगा | मन पवित्र हो तो घर में ही तीर्थ है। | अगर आप नेक इंसान हैं तो कहीं जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि मन चंगा तो कठौती में गंगा। |
| 18 | साँच को आँच नहीं | सच्चे व्यक्ति को डरने की जरूरत नहीं। | मैंने चोरी नहीं की है, इसलिए मैं गवाही देने से नहीं डरता क्योंकि साँच को आँच नहीं। |
| 19 | नेकी कर दरिया में डाल | भलाई करके भूल जाना चाहिए। | किसी की मदद करने के बाद गुणगान नहीं करना चाहिए, बल्कि नेकी कर दरिया में डाल देना चाहिए। |
| 20 | अधजल गगरी छलकत जाए | कम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है। | वह थोड़ा सा पढ़कर खुद को विद्वान समझता है, सच है - अधजल गगरी छलकत जाए। |
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