प्रश्न : दिए गए ढाँचे (मुद्दों) के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा उससे मिलनेवाली सीख भी लिखिए :
1
एक नौकर द्वारा हार चोरी करना — सेठ का सभी नौकरों से पूछना — किसी का चोरी कबूल न करना — सेठ द्वारा युक्ति करना — प्रत्येक को सात-सात इंच की लकड़ी देना — जादू की छड़ी होने की बात कहना — दूसरे दिन दिखाने को कहना — चोर की लकड़ी एक इंच बढ़ जाएगी — घर जाकर हार चुराने वाले नौकर का एक इंच लकड़ी काटना — दूसरे दिन चोर का पकड़ा जाना — सीख।
પૂર્ણ વાર્તા
शीर्षक : सेठ की युक्ति और चोर नौकर (अथवा : जादुई छड़ी)
किसी नगर में एक धनी सेठ रहते थे
सेठ बहुत चतुर और बुद्धिमान थे
सेठ ने सभी से कहा, "ये कोई साधारण लकड़ियाँ नहीं हैं, बल्कि जादुई छड़ियाँ हैं
सभी नौकर अपनी-अपनी लकड़ी लेकर घर चले गए। जिस नौकर ने वास्तव में हार चुराया था, वह सेठ की बात सुनकर बहुत डर गया
उस मूर्ख चोर नौकर ने बचने के लिए तुरंत एक उपाय निकाला। उसने अपनी लकड़ी को नापकर आगे से ठीक एक इंच काट दिया
अगले दिन सुबह सभी नौकर अपनी-अपनी लकड़ी लेकर सेठ के सामने उपस्थित हुए
सेठ तुरंत समझ गए कि असली चोर वही है
सीख (Moral) :
चोरी और अपराध कभी छिपते नहीं हैं। अपराध करने वाला व्यक्ति अपने ही मन के डर और चालाकी के कारण अंततः पकड़ा जाता है।
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2
एक कुम्हार के पास एक गधा और एक कुत्ता होना — रात में चोर का आना — कुत्ते का न भौंकना
शीर्षक : मूर्ख गधा और धोबी का कुत्ता (अथवा : जिसका काम उसी को साजे)
एक गाँव में एक कुम्हार रहता था। उसके पास दो पालतू जानवर थे—एक गधा और एक कुत्ता
एक रात जब सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी घर में कुछ चोर घुस आए
गधे ने जब चोरों को देखा, तो उसे बहुत चिंता हुई। उसने कुत्ते से कहा, "भाई! तुम जाग रहे हो, फिर भी भौंक क्यों नहीं रहे हो? घर में चोर घुस आए हैं, तुरंत ज़ोर-ज़ोर से भौंको ताकि मालिक जाग जाए।"
कुत्ते ने शांत भाव से उत्तर दिया, "तुम मेरा काम मुझे मत सिखाओ। मालिक दिन भर मुझसे पहरेदारी तो करवाता है, लेकिन समय पर भरपेट भोजन नहीं देता और मेरी कद्र भी नहीं करता। जब तक कोई संकट नहीं आएगा, तब तक मालिक को मेरी उपयोगिता का अहसास नहीं होगा।"
गधे ने सोचा कि मालिक का नमक खाया है, इसलिए वफ़ादारी निभाना उसका धर्म है
गधे की तेज़ और कर्कश आवाज़ सुनकर चोर डर गए और तुरंत वहाँ से भाग निकले। उधर गधे के चिल्लाने से कुम्हार की नींद बीच में ही टूट गई। वह गहरी नींद खराब होने के कारण अत्यंत क्रोधित हो गया। उसे बाहर कोई चोर तो दिखाई नहीं दिया, केवल गधा ही बेवजह रेंकता हुआ नज़र आया
क्रोध में आकर कुम्हार ने आव देखा न ताव, एक मोटी लाठी उठाई और गधे की पीठ पर ज़ोर-ज़ोर से बरसाना शुरू कर दिया
सीख (Moral) :
"जिसका काम उसी को साजे, दूजा करे तो डंडा बाजे।" अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति को अपना ही काम करना चाहिए। दूसरों के अधिकार क्षेत्र या काम में अकारण हस्तक्षेप करने से अंततः अपना ही नुकसान होता है।
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અધૂરી વાર્તા પૂર્ણ કરવા માટે વધુ ૪ પ્રશ્નો નીચે મુજબ છે:
૧.
दो बिल्लियाँ — एक रोटी का टुकड़ा मिलना — आपस में बँटवारे को लेकर झगड़ना — एक चालाक बंदर का आना — न्याय करने की बात कहना — तराजू लाना — रोटी के दो टुकड़े करना — दोनों पलड़ों में रखना — जिस पलड़े का टुकड़ा भारी होता, उसमें से थोड़ा खा लेना — बारी-बारी से ऐसा करते रहना — पूरी रोटी समाप्त हो जाना — दोनों बिल्लियों का मुँह ताकते रह जाना — सीख।
૨.
एक किसान के चार बेटे — आपस में हमेशा लड़ते-झगड़ते रहना — किसान का चिंतित होना — किसान का बीमार पड़ना — बेटों को एकता का पाठ पढ़ाने की युक्ति सोचना — सभी को एक-एक लकड़ी देकर तोड़ने को कहना — आसानी से तोड़ देना — लकड़ियों का एक गट्ठर मँगवाना — सभी को गट्ठर तोड़ने को कहना — किसी से न टूटना — किसान द्वारा सीख देना — बेटों की आँखें खुलना — सीख।
૩.
एक कौए को बहुत प्यास लगना — पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना — एक बाग में घड़ा दिखाई देना — घड़े में पानी बहुत कम और नीचे होना — कौए की चोंच पानी तक न पहुँच पाना — कौए का निराश न होना — पास ही कंकड़ (पत्थर के टुकड़े) पड़े देखना — एक उपाय सूझना — चोंच से एक-एक कंकड़ उठाकर घड़े में डालना — पानी धीरे-धीरे ऊपर आना — कौए का पानी पीकर प्यास बुझाना — उड़ जाना — सीख।
૪.
एक चरवाहा लड़का — रोज़ गाँव की बकरियाँ-भेड़ें चराने जंगल जाना — शरारत सूझना — ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना, "भेड़िया आया! भेड़िया आया!" — गाँव वालों का लाठियाँ लेकर दौड़ना — लड़के का हँसना और कहना कि मज़ाक था — लोगों का नाराज़ होकर लौटना — कुछ दिनों बाद सचमुच भेड़िए का आ जाना — लड़के का डरकर चिल्लाना — गाँव वालों का सोचना कि फिर मज़ाक कर रहा है — किसी का न आना — भेड़िए का कई भेड़ों को मार डालना — लड़के का पछताना — सीख।
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