Friday, 2 October 2026

કાવ્ય પંક્તિઓ અને તેનો ભાવાર્થ

 

કાવ્ય પંક્તિઓ અને તેનો ભાવાર્થ (हिन्दी भाषा में)

૧. कलियाँ दरवाजे खोल-खोल,

जब दुनिया पर मुसकाती हैं।

  • ભાવાર્થ :

           सुबह के समय जब नन्हीं कलियाँ अपनी पंखुड़ियों रूपी दरवाजे खोलकर खिलने लगती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वे सोई हुई दुनिया को देखकर मंद-मंद मुसका रही हों और नई उमंग व प्रसन्नता का संदेश दे रही हों।

૨. जब छम-छम बूँदें गिरती हैं,

बिजली चम-चम कर जाती है।

  • ભાવાર્થ :

           वर्षा ऋतु में जब आकाश से छम-छम करती हुई अमृत जैसी बूँदें धरती पर गिरती हैं और बादलों के बीच चम-चम करती हुई बिजली चमकती है, तब प्रकृति का यह सुंदर और मनमोहक रूप देखकर ईश्वर की असीम कृपा और रचना की याद आ जाती है।

૩. जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से,

     मस्ती ढोकर लाती है।

  • ભાવાર્થ :

            प्रातःकाल या वर्षा के समय जब शीतल और मंद पवन कहीं दूर से अपने साथ आनंद, ताजगी और उल्लास का बोझ उठाकर लाती है, तब रोम-रोम खिल उठता है और सृष्टि के रचयिता प्रभु की सहज ही याद आने लगती है।

૪. हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं,

    रंग, रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक हैं।

  • ભાવાર્થ  :

            भारत देश में रहने वाले सभी नागरिक मूल रूप से एक हैं। भले ही हमारे रंग-रूप, शारीरिक बनावट, खान-पान, पहनावा और बोलचाल की भाषाएँ अलग-अलग हों, लेकिन आंतरिक रूप से हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं और राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बँधे हुए हैं।

૫. बेला, गुलाब, जूही, चंपा, चमेली,

     प्यारे-प्यारे फूल गूँथे, माला में एक हैं।

  • ભાવાર્થ  :

             जिस प्रकार बेला, गुलाब, जूही, चंपा और चमेली जैसे भिन्न-भिन्न रंग और सुगंध वाले फूल जब एक धागे में पिरोए जाते हैं तो वे एक सुंदर माला बन जाते हैं; ठीक उसी प्रकार भारत के विविध प्रांतों, जातियों और धर्मों के लोग मिलकर एक अखंड राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

૬. धर्म हैं अनेक जिनका, सार वही है,

    पंथ हैं निराले, सबकी मंजिल तो एक है।

  • ભાવાર્થ :

            हमारे देश में अनेक धर्म और संप्रदाय हैं, परंतु सभी धर्मों का मूल तत्व और शिक्षा (मानवता, सत्य અને સદ્ભાવ) एक ही है। ईश्वर तक पहुँचने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, किंतु सबका अंतिम लक्ष्य और मंज़िल एक ही परम सत्ता की प्राप्ति है।

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