કાવ્ય પંક્તિઓ અને તેનો ભાવાર્થ (हिन्दी भाषा में)
૧. कलियाँ दरवाजे खोल-खोल,
जब दुनिया पर मुसकाती हैं
।
ભાવાર્થ :
૨. जब छम-छम बूँदें गिरती हैं,
बिजली चम-चम कर जाती है
।
ભાવાર્થ :
वर्षा ऋतु में जब आकाश से छम-छम करती हुई अमृत जैसी बूँदें धरती पर गिरती हैं और बादलों के बीच चम-चम करती हुई बिजली चमकती है, तब प्रकृति का यह सुंदर और मनमोहक रूप देखकर ईश्वर की असीम कृपा और रचना की याद आ जाती है
।
૩. जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से,
मस्ती ढोकर लाती है
।
ભાવાર્થ :
प्रातःकाल या वर्षा के समय जब शीतल और मंद पवन कहीं दूर से अपने साथ आनंद, ताजगी और उल्लास का बोझ उठाकर लाती है, तब रोम-रोम खिल उठता है और सृष्टि के रचयिता प्रभु की सहज ही याद आने लगती है
।
૪. हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं,
रंग, रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक हैं
।
ભાવાર્થ :
भारत देश में रहने वाले सभी नागरिक मूल रूप से एक हैं
। भले ही हमारे रंग-रूप, शारीरिक बनावट, खान-पान, पहनावा और बोलचाल की भाषाएँ अलग-अलग हों, लेकिन आंतरिक रूप से हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं और राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बँधे हुए हैं ।
૫. बेला, गुलाब, जूही, चंपा, चमेली,
प्यारे-प्यारे फूल गूँथे, माला में एक हैं
।
ભાવાર્થ :
जिस प्रकार बेला, गुलाब, जूही, चंपा और चमेली जैसे भिन्न-भिन्न रंग और सुगंध वाले फूल जब एक धागे में पिरोए जाते हैं तो वे एक सुंदर माला बन जाते हैं; ठीक उसी प्रकार भारत के विविध प्रांतों, जातियों और धर्मों के लोग मिलकर एक अखंड राष्ट्र का निर्माण करते हैं
।
૬. धर्म हैं अनेक जिनका, सार वही है,
पंथ हैं निराले, सबकी मंजिल तो एक है
।
ભાવાર્થ :
हमारे देश में अनेक धर्म और संप्रदाय हैं, परंतु सभी धर्मों का मूल तत्व और शिक्षा (मानवता, सत्य અને સદ્ભાવ) एक ही है
। ईश्वर तक पहुँचने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं, किंतु सबका अंतिम लक्ष्य और मंज़िल एक ही परम सत्ता की प्राप्ति है ।
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